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श्री गणेश चतुर्थी - पूजन विधि

श्रीगणेश चतुर्थी पूजन विधि
अधिकाँश लोग श्रीगणेश की अपने घर में स्थापना श्रीगंणेश चतुर्थी से एक दिन पहले ही कर लेते हैं ! कुछ लोग श्रीगणेश चतुर्थी वाले दिन ही मूर्ति की स्थापना करते हैं ! बहुत से लोग हर काम मुहूर्त्त देख कर करते हैं तो बहुत से लोग यह मानते हैं कि बप्पा को घर लाने के लिए हर समय ठीक ही होता है ! कोई भी कार्य कभी भी किया जाए, सबसे पहले गणपति बप्पा की ही आराधना की जाती है !

जो गणपति बप्पा हर अशुभ मुहूर्त्त को भी शुभ कर देते हैं, उनकी प्रतिमा स्थापित करने के लिए भला कोई भी मुहूर्त्त अशुभ कैसे हो सकता है ? स्थापना के लिए श्रीगणेश जी की मूर्ति साफ़-सुथरे एवं नये लाल वस्त्र से ढक कर लायें। घर से काला धागा लेकर जाएँ और मूर्ति लाते समय मूर्ति काले धागे से लपेट कर लाएँ ! यदि उन्हें कार में ला रहे हैं तो कार में उन्हें साफ़-सुथरी सीट पर या अपनी गोद में रख कर लायें, डिकी में अथवा निचले स्थान पर कभी भी न रखें !

अपनी सुविधानुसार लोग कम से कम डेढ़, फिर तीन, पांच, सात या ग्यारह दिन की पूजा का संकल्प लेते हैं ! आप जितने दिन का संकल्प लेते हैं ! उतने दिन नियमबद्ध तरीके से श्रद्धापूर्वक गणपति बप्पा की पूजा की जानी चाहिए ! इसके बाद भी आप सामान्य तरीके से गणेश पूजन कर सकते हैं ! चूंकि गणपति प्रतिमा का विसर्जन चतुर्दशी के ही दिन उपयुक्त माना गया है! इसलिए यदि आपका संकल्प कम दिनों का है तो भी चतुर्दशी से पहले ही विसर्जन जरूरी नहीं है ! आप प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद श्रीगणेश जी की प्रतिमा के सम्मुख हाथ जोड़कर श्रद्धापूर्वक शीश झुका कर कहें कि प्रभु आज के दिन भी हमारे परिवार पर अपनी कृपा बनाएं रखें और हमारा आतिथ्य स्वीकार करें ! इसी तरह नित्य प्रभु से विनती करके उन्हें अपने घर में स्थापित रखें तथा चतुर्दशी के दिन विसर्जन करें ! किन्तु किसी कारणवश ऐसा सम्भव ना हो तो गणपति बप्पा से अपनी भूल-चूक की क्षमा याचना कर, अपना संकल्प पूरा होने पर प्रतिमा का विसर्जन किया जा सकता है, किन्तु गणपति विसर्जन से पहले आपके पूजाघर में गणपति निवास आवश्यक है ! यदि आपके पूजाघर में गणपति की मूर्ति नहीं है तो विसर्जन से पहले पूजाघर की जगह के अनुरूप एक उपयुक्त मूर्ति पहले से ही अवश्य स्थापित कर लें, उसके बाद ही गणपति विसर्जन करें !

जितने भी दिन गणपति बप्पा आपके घर स्थापित रहें, आप घर में ताला लगाकर कहीं ना जाएँ ! यदि बच्चों को स्कूल से लाने अथवा किसी आवश्यक कार्य से कहीं जाना हो तो अथवा गणपति की स्थापना करने वाले पति-पत्नी दोनों नौकरी करते हों तो प्रतिदिन काम पर जाने से पहले श्रीगणेश जी को नमस्कार कर शीश झुकाकर कहें कि
हे प्रभु ! आप हमारे स्वामी हो ! हमारे पीछे आपको कोई कष्ट होतो हमें क्षमा करना तथा अपना एवं इस घर का ध्यान रखना ! अगर बच्चों को स्कूल से लेने जाना हो तो भी यह कहकर जाया जा सकता है !

जितने भी दिन का संकल्प लेकर आपने गणपति बप्पा की अपने घर पर स्थापना की है, उतने दिन सुबह-शाम प्रतिदिन उनकी पूजा श्रद्धा और भक्ति से करें ! पूजा में अपने सामर्थ्य अनुसार लड्डू, फल और मेवा आदि का भोग लगाकर प्रसाद बाँटे !

गणेश पूजन के लिए आवश्यक

गणेश पूजन के लिए 7 साबुत सुपारी,5 साबुत पान के पत्ते ताम्बे या पीतल का कलश या लोटा, (आजकल पीतल या ताँबे का लोटा या कलश आसानी से उपलब्ध नहीं होता, ऐसे में स्टील का लोटा या बर्तन इस्तेमाल किया जा सकता है !),इसके अलावा,अक्षत (साबुत चावल), नारियल, ताजे फूल, इत्र, केले के पत्ते, दूर्वा (एक प्रकार की घास), हल्दी, चन्दन (टीके हेतु ), कपूर, धूप व अगरबत्ती, गौ घृत का दीपक, शहद, गुड़, गंगा जल, अखरोट, बादाम, काजू, किशमिश आदि मेवा तथा फल एवं प्रसाद के लिए लड्डू और बिछाने के लिए लाल वस्त्र !

श्रृंगारके लिए एक मुकुट, माला, भुजबन्ध तथा गणेश जी की प्रतिमा के अनुरूप वस्त्र भी होने चाहियें ! यदि आप सभी आवश्यक वस्तुएँ एकत्रित नहीं कर पाते तो अपनी श्रद्धा के अनुसार भक्तिपूर्वक पूजा करने के बाद यह कहना ना भूलें कि “हे स्वामी ! हे गणपति बप्पा ! हमारी हर भूल-चूक क्षमा करें !”
पूजा का शुभारम्भ श्रीगणेश मंत्र से करें -

ॐ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा।।

पूजा का समापन गणेश जी की आरती से करें !
(हमारी वेबसाइट के आरती कॉलम में देखें !)

गणेश चतुर्थी पर तथा गणेशजी की प्रतिमा की स्थापना के समय चन्द्रमा के दर्शन ना करें।

क्यों नहीं देखें - चतुर्थी का चाँद ?